Wednesday, 7 April 2021

urdu shayari in hindi

urdu shayari in hindi

ज़िंदगी तुझ से भी क्या ख़ूब तअल्लुक़ है मेरा जैसे सूखे हुए पत्ते से हवा का रिश्ता
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
इक सिलसिला हवस का है इंसाँ की ज़िंदगी इस एक मुश्त-ए-ख़ाक को ग़म दो-जहाँ के हैं
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

sad urdu shayari

उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
यूँ तो मरने के लिए ज़हर सभी पीते हैं ज़िंदगी तेरे लिए ज़हर पिया है मैं ने
ज़िंदगी कहते हैं जिस को चार दिन की बात है बस हमेशा रहने वाली इक ख़ुदा की ज़ात है
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